अनाम प्रेम
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मेरो वारेमा
Wednesday, November 27, 2024
मुक्तक (हिंड्दै जाँदा)
हिंड्दै जाँदा भीरमा परे के होला ?
पहाड खसी शीरमा झरे के होला ?
स्वर्ग र नर्कको गलफत्ती के गरम्
सोंच्दा-सोंच्दै पीरमा मरे के होला ?
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